Tuesday, June 5, 2012

है अंधकार के बीच में खोया हुआ एक प्राण विचलित,
दुर्दशा से, मूर्छित, भ्रमित,  मरा हुआ सा  भाव सिमित,
क्या चाहिए उसे, कुछ नहीं एक सूर्य चमक, एक भाग्य प्रति ,
एक चन्द्र शीलता, एक द्वार पथ, एक उद्योग प्रण, एक श्रम  निधि ||

मरण मरण  जीव व्याकुल, जीवन सी यह सचाई है,
तार तार सा जीवन वर्णन, इसमें क्या रिझाई है,
बढ़ के आगे कर ले कुछ,  रख ले यह  जीवन  कृति
एक  चन्द्र शीलता , एक द्वार पथ, एक उद्योग प्रण, एक श्रम  निधि ||

तू तो एक मनुष्य है यहाँ तारे तक  ओझल  हो जाते है,
आकाल विकराल  सभी या अनंत से मिल जाते है,
छोड़ते है चमकती रातें फिर भी वो तेरे लिए, थाम  ले और चला चल, खुद बना तू एक विधि,
एक चन्द्र शीलता, एक द्वार पथ, एक उद्योग प्रण, एक श्रम निधि !!