आज के रोमांच को जीवन का नाम न दे,
तनिक से इतहास को मंजिल का प्रमाण न दे,
स्वप्न है यह तो जीवन से गुजरते हुए
यादें तो फिर बन जाती है !!
सागर से तरेते हुए तैराक को जिस तरह,
तेज , अविचलित, उत्साहित लड़ाक को जिस तरह,
उपेक्षाना चाहिए दूसरों के प्राधान्य की,
उसी तरह चला चल, विरक्ति को थामे,
यादें तो फिर बन जाती है !!
प्रतिक्रियाये ह्रदय को उत्तर नहीं देती,
अनभिज्ञता मरहम नहीं होती,
नादान हैं, उन्हें छोड़ दे उनके परियों की कहानियों के साथ,
यादें तो फिर बन जाती है !!
ऐसा नहीं स्नेह में त्याग नहीं होता,
ऐसा नहीं प्रणय में अचेतन मन न्याय विरुद्ध, परन्तु न्यायोचित नहीं होता,
फिर भी यह तेरा प्राधिकार, तेरी वरीयता है कोई अनंत श्रीतिज नहीं,
सहेज, संभल जीवन सुन्दर, यादें तो फिर बन जाती है !!

Very good vivek. U my nigga!!
ReplyDeletesach sach bol kahan se churaya saale !
ReplyDeleteitna achha tu likh sakta hai to 3 saal kahe yahan waste kar diye...
:)
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